Thursday, 6 April 2017

किसानों को समृद्ध बनाने की दिशा में योगी सरकार

  
उत्तर प्रदेश सरकार की पहली बहुप्रतीक्षित कैबिनेट बैठक मंगलवार को हुई.जैसा  की अनुमान लगाया जा रहा था कि योगी सरकार अपने लोककल्याण संकल्प पत्र में किसानों के ऋण माफ़ के वादे को पूरा करेगी ,वैसा ही हुआ.जाहिर है कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व पार्टी अध्यक्ष अमित शाह बार –बार इस बात पर जोर दे रहे थे कि, अगर यूपी में भाजपा सत्ता में आती है तो, सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही किसानों का ऋण माफ़ कर दिया जायेगा,यही कारण है की सरकार गठन के एक पखवारे बाद कैबिनेट की पहली बैठक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुलाई और किसानों को कर्ज मुआफी के जरिये बड़ी राहत देने की घोषणा की.अपने वायदे के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के दो करोड़ से ज्यादा लघु व सीमांत किसानों के कुल 36,359 करोड़ का ऋण माफ़ किया है.इससे एक लाख तक का फसल ऋण लेने वाले किसानों को बड़ी राहत मिली है.सरकार ने उन किसानों को भी मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया है.जिन्होंने कर्ज लिया था मगर उसका भुगतान नहीं कर पाए थे.जिससे वह ऋण गैर निष्पक्षता आस्तियां बन गया था फलस्वरूप उन्हें बैंको ने ऋण देना बंद कर दिया.इन सात लाख किसानों के 5630 करोड़ रूपये की धनराशि को सरकार ने  एकमुश्त समाधान योजना के तहत माफ़ कर दिए.कर्ज माफ़ी को लेकर जब चर्चा शुरू हुई तो सबके सामने एक बड़ा प्रश्न खड़ा था कि पैसे कहाँ से आयेंगें? क्योंकि वित्त मंत्री अरुण जेटली पहले ही स्पष्ट कर चूंके हैं कि राज्य सरकारें अपने संसाधन से किसानों का कर्ज माफ़ कर सकती हैं केंद्र सरकार इसमें कोई मदद नहीं करेगी.इसलिए योगी सरकार ने किसान बांड जारी कर आवश्यक धनराशि जुटाने का फैसला लिया है.कैबिनेट बैठक में किसानों की कर्ज माफ़ी के साथ –साथ कई और अहम फैसलें हुए जिसमें अवैध खनन पर सख्ती,आलू किसानों के लिए समिति का गठन,उधोग को बढ़ावा देने के लिए मंत्रियों का समूह बनाया गया,गेहूं की खरीदारी के लिए 80 लाख मैट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया,एंटी रोमियों स्क्वायड केवल मनचलों पर कार्यवाही करें.इसप्रकार पहली मंत्रिपरिषद की बैठक में योगी आदित्यनाथ ने नौ बड़े फैसले लिए.जिसमें कर्जमाफी के अतिरिक्त किसानों को समृद्ध व सशक्त बनानें के लिए दो और महत्वपूर्ण फैसलें लिए हैं.पहला पांच हजार गेहूं क्रय केंद्र बनेगें सरकार ने 80 लाख मैट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा हैं .सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1625 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है. किसानों को इसमें भी राहत देते हुए सरकार ने दस रूपये क्विंटल दुलाई व लदाई का पैसा भी स्वंय वहन करने की घोषणा की है.खरीदी में पारदर्शिता पर भी सरकार ने जोर दिया है.इसके लिए क्रय केंद्र आधार कार्ड के माध्यम से किसानों की खरीदारी करेंगे तथा आनाज का जो पैसा हुआ वह धनराशी सीधे किसानों के बैंक खातें चली जाएगी.योगी सरकार के इस फैसले को समग्रता से समझें तो इसके कई लाभ हैं.इससे पहले क्रय केन्द्रों की कमी व सही नीति न होने के कारण यूपी सरकार महज पांच से आठ लाख टन ही आनाज किसानों से खरीद पाती थी.किसान क्रय केंद पर अपने आनाज लेकर जाता था तो उसे खुद ही सारे खर्च वहन करते पड़ते थे. स्थिति कितनी बदतर थी इसका अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि किसान क्रय केन्दों पर अपने आनाज को देने से ठगा हुआ महसूस करते थे.समय से भुगतान न होना ,आनाज के तौल पर मनमाने तरीके से कटौती करने से किसान त्रस्त आ चूका था.उपर से बिचौलियों का बोलबाला रहता था जिससे वह औने –पौने दाम में अपने आनाज को व्यापारीयों के हाथों बेचने को मजबूर था. योगी सरकार के इस फैसलें से बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर दिया है.जिसका लाभ किसानों  मिलना तय है.दूसरे अहम फैसले की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पूरब से पश्चिम तक हर किसान आलू की खेती करता हैं.जिससे आलू की पैदावार इतनी हो जाती है कि किसान की लागत मूल्य भी नसीब नहीं होती. कोल्डस्टोरेज की कमी के कारण आलू सड़ने लगते हैं,जिसके चलते किसान आलू को कम दाम में बेचने को मजबूर हो जाता है. सरकार ने किसानों की इस पीड़ा को समझते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है हालाँकि अभी यह कमेटी किस तरह से काम करेगी आलू किसानों को किसप्रकार से लाभ की दिशा में ले जाएगी इसको स्पष्ट नहीं किया गया है.योगी सरकार की पहली बैठक में जो फैसले लिए गयें हैं उससे प्रतीत होता है कि सरकार में मुख्य एजेंडे में गावं ,गरीब ,किसान हैं.सरकार अगर इसी मंशा के साथ किसानों को सशक्त बनाने का दिशा में कदम उठती गई तो, जो किसान खेती छोड़ने को मजबूर हैं,कर्ज के कारण आत्महत्या जैसे बड़े कदम उठाने को मजबूर हैं उसमें भारी कमी आएगी.सरकार के एक के बाद एक किसान हितैषी फैसलों से निश्चित तौर पर यूपी में किसानों को नई आस जगेगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  इस बात को बखूबी जानतें हैं कि अगर उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाना है तो किसानों को निराशा के माहौल से निकलना होगा.किसानों को सशक्त बनाना होगा. 

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