Monday, 3 October 2016

स्वच्छता को लेकर लोगो में आई है जागरूकता





आगामी 2 अक्टूबर गाँधी जयंती के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना “स्वच्छ भारत अभियान” अपने सफलता के दो वर्ष पूरा करने जा रहा है.जैसा कि हमें पता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने “स्वच्छ भारत” का सपना देखा था जो अब तक अधुरा है इसे पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री ने इस योजना को शुरू किया.गौरतलब है की जबसे नरेंद्र मोदी सत्ता की कमान संभालें हैं.एक के बाद एक ऐसी योजनाओं का शुभारम्भ किया है,जो जनता से सीधे तौर पर सरोकार रखतीं हैं.उनमे से सबसे प्रमुख स्वच्छ भारत अभियान है.प्रधानमंत्री मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को गाँधी जयंती के अवसर पर इस योजना को आरंभ किया था.जाहिर है कि इस योजना को 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.योजना को आरम्भ करने से पहले 15 अगस्त 2014 को स्वतंत्रता दिवस के दिन जब प्रधानमंत्री ने स्वच्छता और शौचालय की बात कहीं थी तो आलोचकों ने उनपर जमकर निशाना साधा की लाल किले के प्राचीर से किसी प्रधानमंत्री को शौचालय का जिक्र करना शोभा नही देता,किंतु आलोचना से परे मोदी ने इस अभियान को एक मिशन बनाने का संकल्प लिया और इसमें काफी हद तक सफल भी हुए हैं. दरअसल स्वच्छ भारत अभियान एक ऐसी योजना है.जिसनें लोगो को सफाई संबंधी आदतों को बेहतर बनाना लोगो को गंदगी से होने वाले दुष्प्रभावों के बारें में बताना है.प्रधानमंत्री इस बात को बखूबी जानतें है कि अगर भारत को स्वच्छ बनाना है तो, इसके लिए सबसे जरूरी बात है यह कि इस योजना को जन –जन तक पहुँचाया जाए बगैर जन-जागरूकता के इस मिशन को पूरा नही किया जा सकता. इसको ध्यान के रखतें हुए सरकार ने कई सेलिब्रिटियों को स्वच्छ भारत अभियान का ब्रांडअंबेसडर बनाया ताकि ये लोग जनता को स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूक कर सके.समय –समय पर से सेलिब्रेटी सोशल मीडिया अपनी सफाई करते हुए तस्वीर साझा करते हुए लोगो को स्वच्छता के प्रति जागरूक करतें है,इन सब के बीच प्रधानमंत्री मोदी इस अभियान को लेकर जिसप्रकार की इच्छाशक्ति दिखाई है.वो वाकई काबिलेतारीफ है,कई बार प्रधानमंत्री सफाई के लिए खुद झाड़ू उठा लेतें है और इस बात पर विशेष जोर देतें है कि सफाई के लिए पद की गरिमा कोई मायने नही रखती आप अपनी सफाई लिए लिए स्वय प्रतिबद्ध हो.खैर जब इस योजना की शुरुआत हुई थी तो लोगों ने तमाम प्रकार के सवाल उठायें थे.उसमे प्रमुख सवाल स्वच्छ अभियान पर खर्च होने वाले बजट को लेकर था कि इतना पैसा कहाँ से आएगा ? बता दें कि सरकार ने इस योजना के लिए 62,009 करोड़ का बज़ट रखा है.जिसमें केंद्र सरकार की तरफ से 14623 करोड़ रूपये उपलब्ध कराएँ जायेंगे जबकि 5,000 करोड़ रूपये का योगदान राज्यों को देना होगा.इसके बाद शेष राशि की व्यवस्था पीपीपी व स्वच्छ भारत कोष आदि से प्रबंध किया जायेगा,गौरतलब है कि इस अभियान की सफलता का मुख्य पहलु ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रो में सभी घरों में शौचालय उपलब्ध कराना है.भारत की 75 करोड़ आबादी गावों में रहती है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज़ादी के छह दशक बाद भी इनमें से 50 करोड़ के पास आज भी शौचालय नही है.वर्तमान सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत सबको शौचालय बनवाने की बात कहीं है तथा इसको लेकर सरकार बेहद सक्रिय है.इसका  अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछली सरकार द्वारा शौचालय के लिए  मिलने वाले प्रोत्साहन राशि को भाजपा सरकार ने 9000 हज़ार रूपये से बढ़ाकर 12000 रूपये कर दिया ताकि लोगों पर शौचालय बनाने में पड़ने वाले आर्थिक बोझ से निजात मिल सके.इस प्रकार खुले में शौच से फैल रही गंदगी को रोकने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है.जाहिर है कि स्वच्छता के आभाव में तमाम प्रकार की बीमारीयाँ जन्म ले रहीं है और इसकी जद में आकर लोग काल के गाल में समा जा रहें है.आम-जनमानस के लिए ये गौरव की बात है कि विगत साठ सालों से  हम लगातार बीमारियों को जन्म दे रहें थे परंतु उसके सबसे प्रमुख और सबसे छोटे कारण की तरफ ध्यान नही दे पा रहें थे,अमूमन हम अपने घर के कचरे को कहीं दूर न ले जाकर कहीं आस –पास ही फेक देते है,जिससे उस क्षेत्र मे कचरा इकट्टा होने के कारण मख्खियाँ तथा स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने वालें विषैले कीटाणु जन्म लेतें है.जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है किंतु, प्रधानमंत्री मोदी ने सबका ध्यान उस तरफ आकृष्ट किया और लोगो को बताया कि सबसे ज्यादा जरूरी अपने गली ,गावं, घर तथा दफ्तर को साफ रखना है, इस योजना के आने के पश्चात् स्वच्छता को लेकर लोगों में भारी जागरूकता आई है,लोग और स्वच्छता को लेकर सजग है,उससे भी बड़ी बात ये निकल कर सामने आई है कि लोग दूसरों को भी इस विषय पर जागरूक कर रहें है.स्वच्छता के लाभ को अपने दोस्तों,मित्रों के साथ साझा कर रहें है.सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलाने से बच रहें है.इन सब बातों से स्पष्ट होता है कि जिन उद्देश्यों के साथ सरकार ने इस योजना को शुरू किया था वो अभीतक सही दिशा की ओर बढ़ रहा है,बहरहाल इस योजना को राजनीतिकरण करनें से विपक्ष बाज़ नही आ रहा है,बार –बार इस योजना को लेकर तमाम प्रकार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर रहा है.जिसमें कुछ स्थानों पर गंदगी है,उन तस्वीरों के जरिये विपक्ष द्वारा ये बताया जा रहा है कि स्वच्छ भारत अभियान महज़ एक दिखावा है.इसे विपक्ष की छुद्र मानसिकता ही कहेंगे क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी कई बार स्वच्छ भारत अभियान को राजनीति से या सरकार से नही जोड़ने की बात कही है.लेकिन सरकार की एक के बाद एक सफल होती योजनाओं से हताश विपक्ष इसमें सहभागिता के बजाय राजनीति करने पर तूला हुआ है.बहरहाल,जबसे इस योजना की शुरुआत हुई है,स्वच्छता को लेकर व्यापक स्तर पर सुधार हुए है,मसलन आज रेलवे स्टेशनों पर साफ –सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है,ट्रेनों में शौचालय की सफाई नियमित रूप से होती है.अस्पतालों,बस अड्डो शिक्षण संस्थानों समेत सभी क्षेत्रों में इस अभियान का व्यापक असर देखने को मिल रहा है.इस प्रकार  सब जगह पर चर्चा के केंद्र में स्वच्छ भारत अभियान है.हर्ष की बात ये है कि यह योजना फाइलों तक सिमटने की बजाय धरातल पर दिख रही है.लेकिन 2019 तक इस अभियान को पूरा तभी किया जा सकता है.जब स्वच्छता के प्रति लोगो को और जागरूक किया जा सके,केंद्र सरकार इस इस अभियान को लेकर काफी गंभीर है किंतु राज्य सरकारों और नगर निगमों की उदासीनता चिंतनीय है.