Monday, 13 April 2015

फसलों की बर्बादी पर मोदी का मरहम

         

बेमौसम हुए बरसात और ओलावृष्टि से किसानों  के फसल बर्बाद हो गए है.किसानों की हालत दिन-ब- दिन दयनीय होती जा रही है.इसपर सक्रियता दिखाते हुए केंद्र सरकार ने  एक बड़ी घोषणा की है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बताया कि अब फसलों का नुकसान होने पर किसानो को ढेढ़ गुना मुआवजा दिया जायेगा,तो वहीँ किसानो के लिए राहत की खबर ये भी है कि पहले 50 फीसद फसल बर्बाद होने पर मुआवजा दिया जाता था लेकिन, अब 33 फीसद भी अगर फसल की बर्बादी हुई है तो सरकार उन किसानों को भी मुआवजा देगी.अभी हालहि में हुए ओलावृष्टि से कई राज्य के किसानों आत्महत्या  जैसा कड़ा फैसला लेने को मजबूर हो गए.जहाँ पहले देश में किसानो की आत्महत्या की खबरें महाराष्ट्र के विदर्भ और आंध्रप्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र से आती थी. परन्तु अब हरित क्रांति की सफलता में अहम भूमिका निभाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश,राजस्थान ,पंजाब, हरियाणा  मध्यप्रदेश से भी किसानों ने  आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाया है.अकेले उत्तर प्रदेश में 37,राजस्थान में 55,महाराष्ट्र में 32 तो वहीँ मध्यप्रदेश ने 17 किसानों ने अपनी जान गवाई है.इस साल कितने किसानो ने आत्महत्या की है.अभी इसका ब्यौरा नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने जारी नहीं किया है. लेकिन अगर हम  पिछले रिकॉर्ड को देखें तो हमारे देश में अन्नदाताओं की हालत का पता चलता है.31 मार्च 2013 तक के आकड़े बताते है कि 1995 से अब तक 2,96 438 किसानों ने कृषि में हुए नुकसान  तथा उनपर लदे क़र्ज़ से उबर नहीं पाने के कारण ये घातक कदम उठाने को मजबूर हो गये. विगत एक साल से फसलों की कीमतों में गिरावट आई है जिसके परिणामस्वरुप किसानों की आय कम हुई है.चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री ने किसानों को लागत का 50 प्रतिशत मुनाफा दिलाने  की बात कहीं जो अब तक अमल नहीं कर पाए. अब ये एक और बात मन में आता है  कि कहीं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इसे भी जुमला न करार दे दे. बहरहाल, विगत महीने किसानों से बात करते हुए मोदी ने एक किसान की  हर पीड़ा का जिक्र किया. जो एक किसान को झेलनी पड़ती है ,मोदी ने सरकार की सक्रियता को भी सराहते हुए बताया कि हमारे मंत्री हर राज्य तथा जिलों में जाकर किसानों की बदहाली को देख रहे है और  हर सम्भव मदद के लिए भरोसा दिला रहें है .कृषि प्रधान देश में कृषि और किसान कितने मुश्किलों से गुज़र रहा है.किसानों की बदहाली का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 18 वर्षो में लगभग तीन लाख किसान आत्महत्या कर चुके  हैं फिर भी सरकार मौन रहती हैं,जो अन्नदाता दुसरो के पेट को भरता है आज उसी अन्नदाता की सुध लेने वाला कोई नहीं,किसान  उर्वरक के बढने दामों से परेसान है तो, कभी नहर में पानी न आने से परेसान है और अब तो मौसम भी किसानों पर बेरहम हो गई, बेमौसम बरसात ने किसानों को तबाह कर दिया.आखिर गरीब किसान किस पर  भरोसा करे. सरकार किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए ऋण माफी,बिजली बिल माफी समेत कई राहत पैकेज आदि तो देती रहती है,ये उपाय किसानों को फौरी राहत तो दे देती है न कि उनकी समस्याओं का स्थानीय समाधान. भारत वह देश है जहाँ की दो-तिहाई आबादी विशुद्ध रूप से खेती पर निर्भर है.आज़ादी के इतने सालों के बाद भी किसान अपनी किस्मत सहारे अपनी जिन्दगी जीने को मजबूर है.समय से वर्षा नहीं हुई तो फसल चौपट होने का डर तथा बेमौसम बरसात का डर आज भी किसानों को  सोने नहीं देता.देश में कितने बांध और नहरें क्यों ना बन गई हों  लेकिन तीन-चौथाई किसान आज भी इंद्र देवता की मेहरबानी को ही अपना नसीब मानते है.प्रधानमंत्री को  यह एहसास भी होना चाहिए की इनके द्वारा चलाई गई योंजना भी किसानों तक ठीक से नहीं पहुँच रही.सरकार की योजनाएं ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले गरीब किसान,मजदूर को केवल सुनाई देती है उनतक पहुँचती नहीं..प्रधानमंत्री मोदी अपनी सरकार को हर सरकार से अलग रखते है अब ये देखने वाली बात होगी की मोदी योजनाओं के सही क्रियान्वयन के लिए क्या करते है. गौरतलब है कि अगर सरकार मुआवजा की घोषणा कर देती है तो मुआवजा किसानों तक पहुँचते –पहुँचते काफी लम्बा वक्त गुज़र जाता है और किसान सरकारी दफ्तरों से चक्कर काट-काट के थक जाता है और हार मान लेता है.सरकार भले ही जनधन योजना के जरिये 13 करोड़ से अधिक खाते खोल दिए हो,पर किसानो के लिए वही पुरानी लंबी और लचर व्यवथा ही जारी है.क्या मोदी कुछ ऐसा बड़ा फैसला लेंगे जिससे किसान आत्महत्या जैसा कदम न उठाये.क्या मोदी कुछ ऐसा करेंगे जिससे किसानों तक सीधे सरकार द्वारा दिया गया मुआवजा या योजना का लाभ उन तक आसानी से पहुँच सके.मोदी हर रोज़ एक- एक कानून खत्म करने की बात तो करते अच्छा होगा की मोदी कानून के साथ कृषि के क्षेत्र में जो किसानों की जटिलता है उसे खत्म करे.राजनेताओं के लम्बे –चौड़े वादे सुन –सुन कर किसान त्रस्त आ चुंके है.हर एक राजनीतिक दल सत्ता को पाने के लिए किसानों की हित में बात करता है और चुनाव जीतने के बाद भूल जाता है. मोदी ने भी किसानों के लिए बड़े –बड़े वादें किये है,इस सरकार से किसानों को बहुत उम्मीदें है.अब वो वक्त आ गया है कि मोदी किसानों की उम्मीदों पर खरा उतरे.